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किरण बेदी : प्रधानमंत्री सशक्त और ईमानदार हो--क्या बोले उनके पति

प्रश्न : जब आप आईपीएस चुनी गईं तब समाज में महिलाओं का पुलिस सेवा में जाना अच्छा नहीं माना जाता था। क्या आपको परिवार की ओर से इस तरह की कोई दिक्कत पेश हुई? 
उत्तर : परिवार अगर विरोध करता तो शायद मैं इस पोजीशन तक नहीं पहुँच पाती। किरण बेदी अपने परिवार का ही प्रोडक्ट थी परंतु यह सच है कि उस समय महिलाओं का पुलिस सेवा में जाना समाज की दृष्टि में ठीक नहीं माना जाता था।

प्रश्न : आपकी सफलता में आपके पति का कितना योगदान रहा?
उत्तर : मेरे पति का मेरी हर कामयाबी में भरपूर योगदान रहा। मेरी हर सफलता को वे अपनी सफलता मानते हैं

प्रश्न : आपकी कचहरी के माध्यम से जनता से सीधे संवाद करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
उत्तर : इस कार्यक्रम के माध्यम से हमें एक सामाजिक जरूरत का पता लगा कि आज देश को ऐसे ही फोरम की जरूरत है। वो चाहते हैं कि कोई तुरंत न्याय वाले माध्यम से उनकी कोई मदद करे। ऐसा कोई फोरम हो जिसमें एक ही सुनवाई के भीतर लोगों को त्वरित न्याय मिले। आज यह कार्यक्रम लोगों को न्याय दिलाने का एक माध्यम बन रहा है।

प्रश्न : क्या आपको ऐसा लगता है कि भारतीय न्याय प्रणाली की सुस्तैल व्यवस्था के कारण कई वर्षों तक न्यायालयों में ही प्रकरण लंबित पड़े रहते हैं और लोग न्याय की गुहार करते-करते ही अपने जीवन का आधा समय व्यतीत कर देते हैं?
उत्तर : ये हकीकत है कि न्याय मामले लंबित हैं व न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई में सालों लग जाते हैं। सीनियर ज्यूडीशरी ने भी इसे स्वीकारा है कि हमारे यहाँ अदालतों में बहुत एरियर्स हैं। लोगों को विश्वास नहीं है कि उन्हें न्याय मिल ही जाएगा। इसलिए वो दूसरे रास्ते ढूँढ़ते हैं और उनको कुछ मिलता नहीं है। कोर्ट में मुकदमे बहुत अधिक हैं व उनकी सुनवाई करने वाले जजों की संख्या बहुत कम है, इसीलिए तो वर्तमान में लोक अदालत की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन आज भी बहुत सारी ऐसी बिजली अदालत और लोक अदालत की जरूरत है। 

प्रश्न : जिस तरह से आपके प्रयासों से तिहाड़ जेल तिहाड़ आश्रम में बदल गई, क्या आप मानती हैं कि आज देश की हर जेल को भी तिहाड़ जेल की तरह आश्रम बनाना चाहिए?
उत्तर : जो हमने तिहाड़ जेल में किया वो देश की हर जेल में हो सकता है। इसके लिए आवश्यकता है कि स्वयंसेवी संस्थाओं को इस कार्य में जोड़ा जाए। जितनी ज्यादा स्वयंसेवी संस्थाएँ इस पुनीत कार्य से जुड़ेंगी उतना ही अधिक सुधार होगा तथा कैदियों को शिक्षा के साथ स्वावलंबन के अन्य कार्यों का भी प्रशिक्षण मिलेगा। इससे उनकी आपराधिक प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।

प्रश्न : आपके अनुसार देश का प्रधानमंत्री कैसा होना चाहिए?
उत्तर : देश का प्रधानमंत्री ईमानदार और मजबूत होना चाहिए, लेकिन उसके पीछे मेजोरिटी भी होना चाहिए। अगर मेजोरिटी नहीं है या उस पर ऐसे गठजोड़ हैं जो हर चीज पर कभी हाँ और कभी ना करें तो वो सरकार क्या चलेगी। तो ये गणित नहीं है। यदि वो खुद ही असुरक्षित हो, उसके पास नंबर ही नहीं हो, गणित ही नहीं हो तो वो क्या करेगा। प्रधानमंत्री के पीछे आइडियोलॉजी और सशक्त पार्टी होना चाहिए।

किरन की राजनीति पर क्या बोले उनके पति

 दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सारी उम्मीदें किरन बेदी पर आकर टिक गई हैं। उनके काम करने के अंदाज और जोश से सब वाकिफ हैं। इसके उलट उनकी निजी जिंदगी एक बंद किताब की तरह है। उस किताब में सबसे अहम चेहरा उनके पति बृज बेदी का है, जो अमृतसर में रहते हैं। दोनों करीब तीन दशक से अलग-अलग रहते हैं। किरन बेदी के पॉलिटिक्स में आने सहित कई मसले पर बृज बेदी से बातचीत...

 
किरन बेदी पॉलिटिक्स में आ गई हैं। चुनाव के दौरान आप उन्हें कैसे सपोर्ट करेंगे?
 
मैं शादी के बाद से ही उन्हें सपोर्ट करता रहा हूं। वह राष्ट्र की सेवा के लिए पॉलिटिक्स में गई हैं, नेक मकसद से गई हैं। हमारी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ हैं। दूर रहने से फर्क नहीं पड़ता। हमेशा एक-दूसरे को सपोर्ट करते हैं। दुनिया कुछ भी बोले...बोलती रहे।
 
 
राजनीति में आने से पहले आप दोनों के बीच इस मुद्दे पर कोई सलाह-मशविरा हुआ था?
 
यह उनका अचानक किया गया फैसला था। पीएम नरेंद्र मोदी के प्रभाव में आकर उन्होंने यह फैसला किया। पॉलिटिक्स में आना उनकी किस्मत में था, इसीलिए वह आ गईं। राजनीति कोई आसान काम नहीं। इसके लिए बहुत मेहनत चाहिए। वह अब करीब 66 साल की हैं। इस उम्र में उन्हें खूब मेहनत करनी पड़ेगी।
 
 
आपको लगता है कि वह गुड ऐडमिनिस्ट्रेटर बन सकती हैं?
 
क्यों नहीं बन सकतीं, जरूर बन सकती हैं। उनमें क्वॉलिटी है। वह अनुशासित और ईमानदार हैं। रिजल्ट ओरिएंटेड हैं, मेहनती भी हैं। उनमें अच्छा ऐडमिनिस्ट्रेटर बनने के सारे गुण हैं।
 
 
ऊंचाई हासिल करने के लिए कई बार निजी जिंदगी में बलिदान देने पड़ते हैं। इस कहानी में कितनी कुर्बानियां हैं?
 
मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानता। मुझे समझ नहीं आता कि जब हम विमिन एंपावरमेंट की बात करते हैं, तो महिला को शादी के बाद घर की चारदीवारी में ही कैद करके क्यों रखना चाहते हैं। पत्नी जिंदगी में कुछ करना चाहती है और उसका पति उसे ऐसा करने देता है तो वह कोई अहसान नहीं करता। सक्सेस के ग्लैमर को एक हाउसवाइफ क्यों नहीं एंजॉय कर सकती़ं, किरन को यह मौका मिला है, तो उन्हें एंजॉय करने देना चाहिए। उनकी सफलताओं पर मुझे खुशी और गर्व दोनों है। मैं किस्मत पर यकीन करता हूं, किस्मत ही कर्म तय करती है।
 
कैंपेनिंग के लिए दिल्ली आएंगे?
 
पूरा परिवार उनके साथ है। मैं खराब हेल्थ की वजह से ज्यादा ट्रेवल नहीं कर सकता, इसीलिए दिल्ली नहीं आ पाऊंगा।
 
शादी लव मैरिज थी या अरेंज?
 
हमारी शादी लव मैरिज थी। किरन ने मुझसे शादी करने की इच्छा जताई थी। शादी बहुत ही साधारण तरीके से हुई थी। न ढोल था, न बराती। मंदिर में शादी हुई थी। मेरा मानना है कि शादी करने से पहले उसका मतलब पता होना चाहिए। कहने का मतलब है एक लड़की किसी से शादी कर रही है, तो क्यों वह उसी से कर रही है। किरन की योग्यताओं के बारे में मुझे शुरू से पता था, इसलिए मैंने हमेशा उनका साथ दिया। फिलहाल मैं भी बहुत सोशली एक्टिव हूं और हम हमेशा एक-दूसरे को सपोर्ट करते हैं।
 

 

 
 
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