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दफनाने के लिए चेहरे से चादर हटाई तो बच्ची ने खोल दी आंखे

ग्वालियर: जयारोग्य अस्पताल में भर्ती एक बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया था। परिजन भी उम्मीद छोड़ चुके थे, वह डॉक्टर से छुट्टी कराकर घर ले गए। बच्ची की सांस चलना बंद हुई तो परिजन उसे दफनाने के लिए लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम पहुंचे। यहां बच्ची को दफनाने से पहले जैसे ही उसके चेहरे से चादर हटाई तो बच्ची ने आंखे खोल दी। इसके बाद बच्ची को दोबारा जेएएच में लाकर भर्ती कराया गया है। लखनऊ निवासी स्वाति द्विवेदी ने नवंबर माह में एक बच्ची को जन्म दिया था। 8 दिन पहले तबीयत खराब होने पर उसे जयारोग्य अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया था और उसके हाथ पांव में कोई हरकत नहीं हो रही थी। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक परिजन बच्ची को अपनी मर्जी से छुट्टी कराकर ले गए हैं। परिजन मंगलवार को दोपहर 12 बजे बच्ची को घर लेकर पहुंचे तो उसकी सांस भी रूक चुकी थी। बच्ची को मृत जानकर परिजन उसे दफनाने के लिए दोपहर दो बजे करीब लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम पहुंचे। यहां जैसे ही पिता शिवम द्विवेदी ने बच्ची के चेहरे से चादर हटाई तो उसने आंखे खोल दी। गमजदा परिजनों ने जब बच्ची को जीवित देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसके बाद दोबारा बच्ची को लेकर जयारोग्य अस्पताल पहुंचे, जहां वर्तमान में उपचार जारी है। डिलेवरी के लिए आई थी मायके स्वाति द्विवेदी का विवाह लखनऊ निवासी शिवम से हुआ था। वह डिलेवरी के लिए ग्वालियर महाराज बाड़ा स्थित अपने मायके आई थी। नवंबर माह में उसने एक बच्ची को जन्म दिया था और तबीयत बिगड़ने पर 8 दिन पहले जेएएच में भर्ती कराया था। परिजनों के मुताबिक बच्ची के मृत होने के बाद ही वह अस्पताल से लेकर आए थे, हालांकि अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक परिजन बच्ची को अपनी मर्जी से वेंटिलेटर से उठाकर ले गए थे।



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