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अब कोहरे में भी ट्रेन की रफ्तार पर नहीं लगेगी ब्रेक

जमशेदपुर: सर्दी का मौसम आते ही पंजाब, दिल्ली की ओर से आने वाली ट्रेनों पर कोहरे का साया पड़ने लगा है। इसके कारण ट्रेनें पांच से 20 घंटे विलंब से अपने गतंव्य स्थान तक पहुंच रही हैं। इस कोहरे की मार तो रेलकर्मी झेल ही रहे हैं यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। इन परेशानियों से निपटने के लिए रेलवे ने ट्रेन प्रोटेक्शन वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) व ट्रेन कोलिजन एवायडेंस सिस्टम (टीसीएएस) के साथ ही नवीनतम एलईडी फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। फिलहाल कुछ इंजनों में इसका इस्तेमाल कर परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही पंजाब, दिल्ली से आने वाली सभी ट्रेनों के इंजनों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एक रेल अधिकारी ने बताया कि इससे आने वाले समय में ट्रेनों पर कोहरे का असर नहीं पड़ेगा और अपने सही समय से ट्रेन गंतव्य तक पहुंचेगी। कोहरे को भेदने के लिए फिलहाल चक्रधरपुर मंडल के सिग्नलों में एलईडी फॉग लाइट का इस्तेमाल रेलवे द्वारा किया जा रहा है। इससे चालकों को घने कोहरे के बीच दूर से ही सिग्नल दिख रहा है और वे ट्रेन की रफ्तार कुछ हद तक बढ़ा पा रहे हैं। वर्तमान में इंजन चालक पीली लाइट का सिग्नल देखने पर 30 की स्पीड में ट्रेन चला रहे हैं। जैसे ही ग्रीन लाइट का सिग्नल मिलता है ट्रेन की स्पीड 60 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी जा रही है। घने कोहरे की समस्या को देखते हुए रेलवे ने कुछ इंजनों में ट्रेन कोलिजन एवायडेंस सिस्टम (टीसीएएस) का इस्तेमाल परीक्षण के तौर पर करना शुरू कर दिया है। इसके तहत सेंसर की मदद से चालक ट्रेन की गति को तेज कर सकते हैं। इस सेंसर का इस्तेमाल होने से टूटे हुए ट्रैक को बताने के साथ ही एक ही ट्रैक पर दूसरी ट्रेन के सामने से आने पर ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। ट्रेन दूसरी ट्रेन से एक निश्चित दूरी पर रुक जाएगी। वहीं टीपीडब्ल्यूएस से ट्रेन को चलाने वाले चालक को ट्रेन के वास्तविक पोजिशन की जानकारी सेंसर के माध्यम से घने कोहरे के बीच भी मिलती रहेगी। इस तकनीक का इस्तेमाल कर ट्रेन की स्पीड कोहरे में बढ़ाई जा सकेगी। वहीं जिन इंजनों में नई तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है, वैसे चालकों को घने कोहरे के कारण सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेन की रफ्तार कम करनी पड़ रही है। कोहरे के कारण चालक ट्रेन की रफ्तार घटाकर 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले आते हैं, इसके कारण ट्रेनें देरी से चल रही हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि कोहरे के कारण ड्राइवर को सिग्नल ठीक से दिखाई नहीं देता है। इसलिए कोहरे में ट्रेन की रफ्तार तेज करने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। टीपीडब्ल्यूएस प्रणाली अभी केवल 35 इंजनों में लगी है, जो ड्राइवर को घने कोहरे या बारिश में भी सिग्नल देखने की सुविधा देती है। फिलहाल यह सुविधा कोलकाता मेट्रो के उपनगरीय नेटवर्क में है। जल्द ही भारतीय रेलवे में इसका इस्तेमाल किया जाएगा और कोहरे में भी ट्रेन अपनी रफ्तार में चल सकेगी।



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