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2014 के बाद पहली बार 70 डॉलर से ऊपर गया कच्‍चा तेल

सिंगापुर : पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन के लिए कच्‍चे तेल के आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों परेशानी बढ़ने वाली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमत 2014 के बाद पहली बार 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई। दिलचस्प है कि यह महज खपत और आपूर्ति का मामला नहीं है। कच्‍चे तेल में निवेश भी बढ़ता जा रहा है। निवेशक यह सोचकर इस पर दांव लगा रहे हैं कि पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के नेतृत्व में कच्‍चे तेल का उत्पादन घटाए जाने के कारण पूरे साल इसमें तेजी बनी रहेगी। लेकिन, कुछ ट्रेडर चेता रहे हैं कि दुनिया में कच्‍चे तेल के सबसे बड़े उपभोक्ता एशिया में खपत घटने के संकेत हैं। शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 की शुरुआत से अब तक चीन से डीजल का निर्यात तकरीबन 3 हजार फीसदी बढ़ा है। दिसंबर, 2017 में वहां से 20 लाख टन से ज्यादा डीजल का निर्यात किया गया। पिछले माह चीन से 10 लाख टन से ज्यादा गैसोलीन का निर्यात किया गया, जो 2015 की शुरुआत से अब तक करीब 365 फीसदी बढ़ोतरी दर्शाता है। दिसंबर में चीन का रिफाइंड ऑयल का कुल उत्पादन रिकॉर्ड 61.7 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया। चीन में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात बढ़ने का असर यह हुआ कि एशिया के बेंचमार्क सिंगापुर रिफाइनिंग मार्जिन 2017 के ऊंचे स्तर से लगभग 90 फीसदी घटकर इस हफ्ते 6 डॉलर प्रति बैरल से भी कम रह गया। यह पिछले 5 साल का न्यूनतम सीजनल लेवल है। ऊर्जा सलाहकार फर्म ट्रिफेक्टा के निदेशक सुक्रीत विजयकर ने कहा, "मार्जिन घटने के कारण निकट अवधि में कच्‍चे तेल (इंक्रीमेंटल) की मांग घट सकती है। नतीजतन ग्लोबल मार्केट में इसकी कीमतों पर दबाव बन सकता है।" इसी हफ्ते बीएमआई रिसर्च ने एक नोट में लिखा था, "पहली तिमाही में ब्रेंट कू्रड (कीमतें) के लिए जोखिम संतुलन गिरावट के रुझान पर निर्भर करता है।" क्यों आई तेजी? 1. सबसे बड़ा कारण तो यही है कि ओपेक और रूस ने कीमते बढ़ाने के उद्देश्य कच्‍चे तेल के उत्पादन में कटौती की है। 2. निवेशकों को लग रहा है कि दुनियाभर में कच्‍चे तेल की मजबूत मांग बनी रहेगी, लिहाजा उन्होंने इसमें निवेश बढ़ाया है। 3. सैक्सो बैंक के कमोडिटी रणनीति प्रमुख ओले हैनसेन मानना है कि इन दिनों गिरावट के मुकाबले तेजी के संकेत मजबूत हैं। थम भी सकती है तेजी तेजी के मौजूदा माहौल के बीच इस बात की गुंजाइश भी बन रही है कि रुझान एकदम से पलट जाए। दरअसल, अमेरिका में तेल का उत्पादन बढ़ रहा है। इस वजह से ओपेक और रूस का उत्पादन घटाकर दाम बढ़ाने का दांव उल्टा पड़ सकता है। अमेरिका में उत्पादन बढ़ने से पहले भी कच्‍चे तेल के दाम गिर चुके हैं। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में कच्‍चे तेल के शुद्घ आयातक से शुद्घ निर्यातक बन गया है। भारत भी अब अमेरिका से कच्चा तेल आयात करने लगा है।



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