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अर्थव्यवस्था में मंदी से निबटने के लिए पीएमईएसी ने 10 सूत्री कार्ययोजना की रुपरेखा पेश की

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने संकेत दिए हैं कि अर्थव्यवस्था में मंदी है. परिषद का ये रुख ऐसे समय में आया जब सप्ताह भर पहले ही प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर पेश की थी. साथ ही अर्थव्यवस्था को लेकर निराशा फैलाने वालों को आड़े हाथों लिया था. 4 अक्टूबर को ही एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कुछ लोगों को निराशा फैलाने में बड़ा आनंद आता है, बहुत आनंद. उनको रात को बहुत अच्‍छी नींद आती है. और ऐसे लोगों के लिए आजकल एक quarter की growth कम होना, जैसे सबसे बड़ी खुराक मिल गया है. अब ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है. ऐसे लोगों को जब data अनुकूल होता है, तो उन्‍हें वो institute भी अच्‍छे लगते हैं, वो process भी सही लगता है. लेकिन जैसे ही ये data उनकी कल्‍पना के प्रतिकूल होता है, तो ये कहते हैं संस्‍थान ठीक नहीं है, process ठीक नहीं है, करने वाले ठीक नहीं हैं, भांति-भांति के आरोप लगाते हैं. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले ऐसे लोगों को पहचानना बहुत जरूरी है अपने इस संबोधन के जरिए मोदी ने आर्थिक विकास को लेकर हो रही आलोचनाओं का तीखा जवाब दिया था. साथ ही गाड़ियों की बिक्री, हवाई यात्रियों की संख्या, विदेशी निवेश, फोन कनेक्शन और ट्रैक्टर की बिक्री में भारी बढ़ोतरी के आंकड़े पेश कर ये बताने की कोशिश की कि अर्थव्यवस्था पटरी पर है. बहरहाल, प्रधानमंत्री की नवगठित आर्थिक सलाहकार परिषद का रुख कुछ अलग दिखा. पहली बैठक के बाद परिषद के मुखिया बिवेक देबरॉय ने अर्थव्यवस्था में मंदी की ओर से इशारा किया. परिषद के मुखिया और नीति आयोग के सदस्य बिवेक देबरॉय ने कहा कि सदस्यों के बीच विकास दर में आ रही गिरावट के कारणों को लेकर सहमति है. लेकिन ये कारण कौन-कौन से है, इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया. देबरॉय का ये कथन ऐसे समय में आया है जब दो बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ-साथ रिजर्व बैंक ने विकास के अनुमान घटा दिए हैं. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने विकास दर के अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिए वहीं विश्व बैंक की राय में भारत की विकास दर 2015 के 8.6 फीसदी के मुकाबले 2017 में सात फीसदी रह सकती है. पिछले ही हफ्ते रिजर्व बैंक ने विकास के अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी करने की बात कही थी. हालांकि परिषद के सदस्य और जाने माने अर्थशास्त्री रथिन रॉय की राय है कि आईएमएफ के अनुमान हमेशा गलत ही साबित हुए हैं. इस बीच परिषद ने ऐसे दस मुद्दों की पहचान की है जिनपर विस्तार से चर्चा कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उनके लिए सुझाव दिए जाएंगे. इन मुद्दों में आर्थिक विकास रोजगार व नौकरियों के नए मौके तैयार करना असंगठित क्षेत्र वित्तीय ढ़ांचा मौद्रिक नीति सरकारी खर्च आर्थिक शासन विधि की संस्थाएं कृषि व पशुपालन खपत के चलन व उत्पादन, और सामाजिक क्षेत्र परिषद की अब अगली बैठक नवंबर में होगी जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के रिपोर्ट पर चर्चा होगी. इसके बाद विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए सुझावों की रुपरेखा तैयार होगी जिसे प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा.



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