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1000 करोड़ का घोटालेबाज है एमके सिंह

भोपाल 12 अगस्त: केंद्र सरकार की अनिवार्य सेवानिवृत्ति कार्यवाही की जद में आए एमपी के पहले आईएएस अधिकारी एमके सिंह 1000 करोड़ के जमीन और खरीदी घोटाले के आरोपी हैं। इन्हीं घपलो को लेकर सिंह के विरुद्ध लोकायुक्त में 12 केस दर्ज हैं। उधर, पारिवारिक तौर पर भी सिंह के रिश्ते काफी उलझन भरे रहे। लगभग 10 साल से वे अपनी आईएएस पत्नी से अलग रह रहे हैं। मंत्रालय में ओएसडी के पद पर छह माह से पदस्थ रहे 1985 बैच के आईएएस अधिकारी सिंह को कल जिला प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश थमाया गया। आदेश के साथ सरकार की ओर से उन्हें तीन माह का अग्रिम वेतन भी दिया गया है। सिंह पर ओरछा की 400 करोड़, सागर की 250 करोड़, जबलपुर की 250 करोड़, रीवा की 70 करोड़ रुपए की जमीन सरकारी से निजी करने का आरोप है जिसकी जांच की जा रही है। इसके अलावा अशोकनगर की भी करोड़ों की जमीन के मामले में गलत फैसले के चलते वे जांच के घेरे में हैं। इन घोटालों के चलते लोकायुक्त ने इनके विरुद्ध 12 मामले में जांच शुरू कर रखी है। सरकार ने राजस्व मंडल में पदस्थी के दौरान इनके कारनामे सामने आने के बाद छह माह से अधिक समय से इन्हें मंत्रालय में ओएसडी बना रखा था। साथ ही एक कमेटी का गठन कर इनके विरुद्ध अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था जिस पर डीओपीटी ने सहमति जताते हुए दो दिन पहले आदेश जारी कर दिए। इसे कल तामील कराया गया। आईएएस सिंह ने अपनी नौकरी की शुरुआत सहायक कलेक्टर के तौर पर जांजगीर (बिलासपुर) से 2 जून 88 से शुरू की थी। इसके बाद वे रीवा में अपर कलेक्टर, भोपाल में नगरीय विकास में अपर संचालक रहे और 1993 में पन्ना में पहली कलेक्टरी की। बाद में उन्हें अपर आयुक्त आबकारी ग्वालियर, आजाक विभाग, संचालक व कमिश्नर अजा विभाग बनाया गया। अप्रेल 2004 में वे राजस्व मंडल के सदस्य बने और यहीं से सरकारी जमीन के रिकार्ड निजी लोगों के नाम पर करने की शुरुआत हुई। इसके बाद कुछ सालों तक वे दूसरे पदों पर रहे जिसमें राज्य शिक्षा केंद्र की पदस्थपान भी शामिल है। यहां तीन करोड़ की खरीदी आठ करोड़ में करने का आरोप उन पर है। वर्ष 2010 से फिर राजस्व मंडल में पदस्थ किए गए। यहीं से जमीन घोटाले वाले फैसले होते रहे।



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