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महिला हितों की अनदेखी वाले 12 राज्यों पर दो-दो लाख का जुर्माना

नई दिल्ली:महिला हितों को नजरंदाज करने पर 12 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों पर दो-दो लाख का जुर्माना सुप्रीम कोर्ट ने लगाया है। केंद्र के पत्र पर अधूरा जवाब देने पर बाकी राज्यों पर भी एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है कि राज्य व केंद्र शासित प्रदेश लिंग भेद पर बात करना बंद करें। जस्टिस मदन बी लोकुर व दीपक गुप्ता की बेंच ने केंद्रीय सचिव की दलील पर यह कठोर फैसला दिया। केंद्र सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया कि पत्र लिखने के बाद भी 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने जवाब ही नहीं दिया तो बाकियों का रवैया टालने वाला रहा। उनके जवाब अधूरे हैं। केंद्र ने महिला कल्याण के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं का ब्योरा मांगा था। जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर दो-दो लाख का जुर्माना लगाया गया उनमें गुजरात, मध्य प्रदेश, असम, उत्तराखंड, कर्नाटक, पंजाब व दादर नगर हवेली शामिल हैं। अदालत ने सभी राज्यों से कहा कि वे तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब केंद्र को भेजें। अगर ऐसा नहीं होता है तो अदालत में सभी राज्यों के मुख्यसचिवों को पेश होना होगा। अदालत ने विधवा महिलाओं की स्थिति का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए छह सदस्यीय कमेटी की सराहना की। बेंच का मानना था कि इससे विधवाओं के उद्धार के लिए यह अच्छा प्रयास है। कमेटी ने अदालत से सिफारिश की है कि इसे सभी राज्यों को भेजा जाना चाहिए जिससे उनका पक्ष इस पर स्पष्ट हो सके। गौरतलब है कि वृंदावन के आश्रय घरों में दयनीयहालत में रह रहीं विधवाओं की स्थिति को लेकर 2007 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। उसकी सुनवाई के दौरान अदालत ने कमेटी का गठन किया था। मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी 2018 को तय की गई है।


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