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देशभर में महाशिवरात्रि की धूम, दर्शन और अभिषेक के लिए मंदिरों लगा तांता

नई दिल्ली: महाशिवरात्रि के त्योहार आज देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर राज्य के हर गांव और शहर में भक्त भगवान शिव के अभिषेक और दर्शनों के सुबह से ही पहुंच रहे हैं। शिव मंदिरों का आकर्षक श्रृंगार किया गया है। उज्जैन में जहां बाबा महाकाल की भस्मारती देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। महाशिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अगर भोलनाथ को खुश कर लिया, तो आपके सभी बिगड़े काम सफल हो जाते हैं। लेकिन इस बार शिवभक्तों को भोलनाथ को खुश करने के दो अवसर मिल रहे हैं। क्योंकि इस बार शिवरात्रि दो दिन मनाई जा रही है। 13 फरवरी यानी आज की रात 10 बजकर 35 मिनट पर चतुर्दशी तिथि का शुभारंभ होगा। वहीं, 14 फरवरी की रात 12 बजकर 46 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। ऐसे में दोनों ही दिन श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सकते हैं। क्या है महाशिवरात्रि मनाने की मान्यता महाशिवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। सालभर भक्त इस दिन का इंतजार करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ विवाद हुआ था। महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यही कारण है कि इस बार दो दिन महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। आज देर रात से चतुर्थी तिथि लग रही है। उज्जैन महाकाल मंदिर में भस्मारती का दृश्य मध्यप्रदेश के उज्जैन महाकाल मंदिर में भोलनाथ को सजाया गया है। महाकाल की भस्मा आरती की गई। सुबह से महाकाल के दर्शन के लिए भक्त लाइन में लगे हुए हैं। भोलनाथ के जयकारों से मंदिर गूंज रहा है। वहीं, पुणे के भीमाशंकर मंदिर में भी शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। पूरा वातावरण भक्तिमय हो रखा है। चारों दिशाओं से भगवान शिव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। ऐसे भोलेनाथ को करें खुश आपको बता दें कि भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंग हैं। कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन इन ज्योर्तिलिंगों के दर्शन बहुत भाग्यशाली और शुभ होता है। इस दिन शिवभक्त जल और कच्चे दूध से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। जिसके बाद चंदन, फूल, बेलपत्र से शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ाए जाते हैं, कहते हैं कि इससे वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। शिवजी का जलाभिषेक केवल तांबे या पीतल के लोटे से ही करें। महाशिवरात्रि के अवसर पर कई जगहों पर तो आज के दिन भोलेनाथ की बारात निकालने की भी परंपरा है।



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