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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत की सेवाओं का विस्तार, जून, 2019 तक बने रहेंगे CEO

नई दिल्ली : नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का सेवाओं में अगले साल जून तक विस्‍तार किया गया है. अमिताभ कांत अब 30 जून, 2019 तक अपनी सेवा देंगे. सरकार ने उनका कार्यकाल बढ़ा दिया है. कांत 1980 बैच के अधिकारी हैं. जून 2019 तक बने रहेंगे सीईओ सरकार की ओर से मिले आदेश के बाद उनका सेवाकाल बढ़़ाया गया है. इसके पूर्व वे औद्योगिक नीति व प्रोत्साहन विभाग के सचिव थे. वे भारतीय प्रशासनिक सेवा केरल कैडर के 1980 बैच के अधिकारी हैं. उन्हें 2016 में नीति आयोग का सीईओ नियुक्त किया गया था. संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) में सचिव पद से रिटायर होने के बाद उन्हें नीति आयोग का सीईओ बनाया गया था. उन्होंने पिछले साल फरवरी में सिंधुश्री खुल्लर का स्थान लिया था. एटीएम, पीओएस सब हो जाएंगे बेमानी हाल ही में अधिकारी अमिताभ कांत ने बड़ा बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि तीन साल बाद लोगों को वित्तीय काम के लिए बैंक में जाने की जरूरत ही नहीं होगी और इनका अस्तित्व भी नहीं होगा. नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा था कि डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम और पांइट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें सभी 2020 तक देश में बेमानी हो जाएंगी. किसी भी प्रकार के लेनदेन के लिए सिर्फ अंगूठे का इस्तेमाल होगा. उन्होंने कहा, ‘भारत आज वित्तीय प्रौद्योगिकी और सामाजिक नवोन्मेष दोनों क्षेत्रों में भारी उठापटक के दौर से गुजर रहा है. इन क्षेत्रों में यहां काफी कुछ नई चीजें हो रहीं हैं और यही उठापटक भारत को काफी आगे ले जायेगी. और 2020 तक मेरा मानना है कि अगले ढाई साल में भारत में सभी तरह के डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, एटीएम मशीनें और पीओएस मशीनें पूरी तरह से बेकार हो जायेंगी.’ गोमांस सेवन की वकालत अमिताभ कांत ने गोमांस की तरफदारी करके राजनीति में हलचल पैदा कर थी. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत जैसे लोकतंत्र में लोगों को बीफ सहित वह जो कुछ भी खाना चाहते हों, उसकी आजादी होनी चाहिए. कांत ने बाद में स्पष्ट किया कि वह एक समारोह के दौरान ‘स्टार्ट-अप’ योजना के बारे में सवालों का जवाब दे रहे थे. उसी दौरान अचानक बीफ विवाद पर सवाल किए गए. उन्होंने कहा, ‘मैंने केरल में सामान्य व्यवहार के बारे में जवाब दिया, जो मेरा कैडर राज्य है. इसका प्रसंग वही था.’ भारत सरकार के औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग में सचिव कांत ने कहा था, ‘मेरा मानना है कि हम लोकतंत्र में हैं जिसमें लोगों को यह तय करने का अधिकार है कि वे क्या कहना चाहते हैं, जो लोगों को यह तय करने की अनुमति देता है कि वे क्या खाना चाहते हैं.’



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