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दोष सिद्ध होने से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति गलत : अकबर

रायपुर :छत्तीसगढ़ में दागी अफसरों और कर्मचारियों को नौकरी से बाहर किए जाने को लेकर कांग्रेस मुखर हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय मामलों के प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने इस मुद्दे पर सरकार की खिंचाई की और कहा कि शासकीय सेवकों को दोषसिद्ध होने से पहले ही अनिवार्य सेवानिवृत्ति देना असंवैानिक और अन्यायपूर्ण है। शनिवार को राजानी के कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अकबर ने सरकार को कठघेरे में खड़ा करते हुए भाजपा सरकार पर संविधान के अनुच्छेद-311 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सरासर अन्याय है। शासकीय सेवकों के प्रति अमानवीय रवैया है। अकबर ने ये भी कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति अभियान सिर्फ छोटे कर्मचारियों के खिलाफ चलाया जा रहा। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार दागी मंत्रियों पर भी कार्रवाई करेगी। ऐसी कार्रवाई आदिवासी और पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आईएएस, आईपीएस और राज्य सेवा के सैकड़ों अफसरों के खिलाफ एसीबी और ईओडब्ल्यू में करोड़ों स्र्पए के भ्रष्टाचार के मामले दर्ज या लंबित हैं। ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जगह सरकार उनको प्रमोट भी कर रही है। सेवानिवृत्त करने का अभियान तत्काल बंद हो अकबर ने कहा कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति को तत्काल बंद किया जाना चाहिए। छानबीन समितियों द्वारा अक्षम, अयोग्य तथा भ्रष्ट पाए गए शासकीय सेवकों को तीन माह का नोटिस अथवा तीन माह का वेतन देकर सेवानिवृत्त किया जाना है। अनिवार्य सेवानिवृत्ति का जो आदेश जारी किया जा रहा है, उनमें यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि शासकीय सेवक अक्षम पाया गया है या अयोग्य है या फिर भ्रष्ट पाया गया है।



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