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कौन हैं CJI पर आरोप लगाने वाले SC के ये 4 जज

नई दिल्ली : आजादी के बाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशभर में हलचल ला दी है। सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस रंजन गोगोई द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा पर लगाने के बाद देश की राजनीति और सुप्रीम में जारी अंदरुनी कलह को लेकर कोहराम मच गया है। इन जजों ने सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन में अनियमितताओं पर सवाल खड़े किए हैं। आइए जानते हैं सीजेआई दीपक मिश्रा पर आरोप लगाने वाले इन 4 जजों के बारे में - जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर - आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर केरल और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं, जिन्हें वकालत विरासत में मिली। भौतिकी विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने 1976 में आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। अक्टूबर, 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर और रोहिंगटन फली नरीमन की 2 सदस्यीय बेंच ने उस विवादित कानून को खारिज किया जिसमें पुलिस के पास किसी के खिलाफ आपत्तिजनक मेल करने या इलेक्ट्रॉनिक मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार करने का अधिकार था। उनके इस फैसले की देशभर में जमकर तारीफ हुई और बोलने की आजादी को कायम रखने पर खूब वाहवाही भी मिली। साथ ही, चेलमेश्वर ने जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइन्ट्मन्ट्स कमीशन (NJAC) का समर्थन किया। इतना ही नहीं, वे पहले से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था की आलोचना भी कर चुके हैं। जस्टिस रंजन गोगोई - असम से आने वाले जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों में शामिल हैं और इनके पिता केशब चंद्र गोगोई असम के सीएम रहे हैं। वरिष्ठता के आधार पर अक्टूबर, 2018 में वह देश की सबसे बड़ी अदालत में जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। अगर ऐसा होता है तो वह भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर काबिज होने वाले पहले जज होंगे। गुवाहाटी हाई कोर्ट से करियर की शुरुआत करने वाले गोगोई फरवरी, 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। अप्रैल, 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने। जस्टिस मदन भीमराव लोकुर - दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने बाद में दिल्ली से ही कानून की डिग्री भी ली। 1977 में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। 2010 में वे फरवरी से मई तक दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर काम किया। जून माह में उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। जस्टिस कुरियन जोसेफ - जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 1979 में अपनी वकालत के करियर की शुरुआत की। सन 2000 में वह केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चुने गए। इसके बाद फरवरी, 2010 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 8 मार्च, 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने।



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