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सीक्रेसी के साथ छपेंगे इलेक्टोरल बॉण्ड

नई दिल्ली : इलेक्टोरल बॉण्ड्स की छपाई ठीक उसी गोपनीयता के साथ की जाएगी जैसी कि भारतीय नोटों की छपाई के दौरान बरती जाती है। दरअसल केंद्र सरकार राजनीतिक दलों की फंडिंग के इस सिस्टम को पूरी तरह फुलप्रूफ रखना चाहती है ताकि मार्केट में कोई फेक इन्ट्रूमेंट न आ जाए। वित्त मंत्रालय के एक सूत्र के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड किसी भी नए राजनीतिक दल को गिफ्ट में नहीं दिए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धन उगाही के जरिए रातोंरात नए दलों की भरमार न हो जाए। इसके अलावा सूत्र ने बताया कि इस बॉण्ड को देश के सबसे बड़े कर्जदाता (बैंक) भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चुनिंदा शाखाओं के माध्यम से ही बेचा जा सकेगा। राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के इरादे से केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार (2 जनवरी) को नए इलेक्टोरल बॉण्ड की रुपरेखा को अंतिम रुप दे दिया था। इसे नकदी के उस विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है जो चंदे के रुप में राजनीतिक पार्टियों को मिलते हैं। हालांकि राजनीतिक पार्टियां इसे विशिष्ट बैंक अकाउंट के माध्यम से ही भुना पाएंगे। सूत्र ने बताया कि इन बॉण्ड्स को अत्यंत गोपनीयता के साथ मुद्रित किया जाएगा और इसके विवरण के संबंध में उतनी ही गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी जितनी की भारतीय मुद्रा नोटों के मुद्रण के समय रखी जाती है। हम अपनी इस रिपोर्ट में आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ये बॉण्ड किस तरह से काम करते हैं.... क्या है इलेक्टोरल बॉण्ड:     यह एक प्रॉमिसरी नोट्स (वचन पत्र) के साथ वाला बियरर इंस्ट्रूमेंट होता है।     यह एक इंटरेस्ट फ्री बैकिंग इंस्ट्रूमेंट है। कौन खरीद सकता है इलेक्टोरल बॉण्ड:     भारत का नागरिक या भारतीय संघ में शामिल कोई इकाई     कहां से खरीदे जा सकते हैं ये बॉण्ड:     स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की किसी शाखा का चयन करें। कितने गुणांक में हो सकते हैं ये बॉण्ड:     इन्हें एसबीआई की विशेष शाखाओं से 1,000 एवं 10,000 एवं 1,00,000 एवं 10,00,000 एवं 1,00,00,000 के गुणांक में जारी किया जाएगा। इलेक्टोरल बॉण्ड को खरीदने के लिए ग्राहक को क्या करना चाहिए?     खाते खोलते समय मौजूदा केवाईसी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा।     बॉण्ड की खरीद का भुगतान बैंक अकाउंट के जरिए ही किया जा सकता है।     इस बॉण्ड में भुगतानकर्ता का नाम शामिल नहीं होगा। क्या होगी इस बॉण्ड की अवधि?     इस बॉण्ड की अवधि या वैलिडिटी 15 दिनों की होगी। कब खरीदे जा सकते है बॉण्ड?     जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के प्रत्येक 10 दिन में।     लोकसभा चुनावों के दौरान अतिरिक्त तीस दिनों के बारे में जानकारी दी जाएगी। कौन सी पार्टियां खरीद पाएंगी इलेक्टोरल बॉण्ड?     उन्हीं पार्टियों को इलेक्टोरल बॉण्ड के जरिए डोनेशन दिया जा सकेगा जो कि रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुव एक्ट 1951 के सेक्शन 29 के अतर्गत रजिस्टर्ड होंगी।     जिन पार्टियों ने बीते लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कुल वोटों में से 1 फीसद से ज्यादा वोट हासिल किए हों। इन बॉण्ड्स को कैसे कराया जा सकेगा इनकैश? राजनीतिक दल एक नामित बैंक खाते के माध्यम से इस बॉण्ड को भुना पाएंगे।



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