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धनतेरस : 1200 साल पुरानी है भगवान कुबेर की ये प्रतिमा

मंदसौर : धनतेरस पर धन के देवता 'कुबेर" और आयुर्वेद के जनक भगवान 'धन्वंतरि" की भी विशेष आराधना की जाएगी। शहर से सटे खिलचीपुरा स्थित 1200 वर्ष पुराने धौलागढ़ महादेव मंदिर मेें 7वीं शताब्दी की भगवान कुबेर की प्राचीन मूर्ति स्थापित है। पुरातत्व विभाग के अधीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए शासन ने संरक्षण अधिसूचना में शामिल कर लिया है। अब पुरातत्व विभाग जीर्णोद्धार के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार करेगा। मंदिर में धन तेरस पर 17 अक्टूबर को दिनभर धार्मिक अनुष्ठान होंगे। विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी महादेव पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है खिलचीपुरा में श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर। यहां शिव के साथ ही कुबेर की मूर्ति भी है। विश्व में दो ही स्थान ऐसे हैं। जहां शिव पंचायत में कुबेर भी शामिल है। एक चार धामों में शामिल केदारनाथ और दूसरी मूर्ति धौलागढ़ महादेव मंदिर में हैं। पुरातत्व विभाग के डॉ. कैलाश शर्मा के अनुसार श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर लगभग 1200 साल पहले बना मराठा कालीन है। इसी मंदिर में स्थापित भगवान कुबेर की मूर्ति उत्तर गुप्तकाल में 7वीं शताब्दी में निर्मित है। मराठाकाल में धोलागिरी महादेव मंदिर के निर्माण के दौरान इसे गर्भगृह में स्थापित किया गया था। मंदिर में भगवान गणेश व माता पार्वती की मूर्ति भी है। 1978 में इस मूर्ति की पहचान हुई। प्रतिमा में कुबेर बड़े पेट वाले, चतुर्भुजाधारी सीधे हाथ में धन की थैली और तो दूसरे में प्याला धारण किए हुए है। नर वाहन पर सवार इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग तीन फीट है। सरंक्षण के लिए सूची में किया शामिल प्राचीन व पुरातत्व महत्व का मंदिर होने से इसकी संरचना में बदलाव नहीं किया जा सकता है। विभाग द्वारा संरक्षण अधिसूचना में शामिल किए जाने पर अब इसके जीर्णोद्धार व अन्य सुविधाओं के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। भोपाल से इंंजीनियरों के जल्द ही आने की उम्मीद है। धार्मिक अनुष्ठान धोलागढ़ महादेव मंदिर के पं. हेमंत गिरी ने बताया कि कुबेर मंदिर पर 17 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से विशेष अनुष्ठान शुरू होंगे। महाभिषेक, हवन व पूजन किया जाएगा। आकर्षक श्रंगार किया जाएगा। सुबह 10 बजे कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव पूजा-अर्चना करेंगे।। इसके बाद हवन प्रारंभ होगा। इसकी पूर्णाहुति रात 12.30 बजे होगी। ताखाजी में है धन्वंतरी की मूर्ति भारतीय ज्योतिष परिषद अध्यक्ष पं. शिवप्रकाश जोशी के अनुसार गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र में स्थित तक्षकेश्वर महादेव मंदिर (ताखाजी) में भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा है। यह भारत भर में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि धनतेरस पर आयुर्वेद के देव धन्वंतरि को पूजने से रोगों से मुक्ति मिलती है। यहां भी धार्मिक



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