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आरुषि हत्याकांडः जाने 16 मई 2008 की उस रात के बाद क्या हुआ अब तक

नई दिल्ली  :चर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपित द्वारा उम्रकैद के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला आ गया है। अदालत ने इस हत्याकांड के 8 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी राजेश तलवार और नूपुर तलवार को रिहा कर दिया है। जानिए कब क्या हुआ वो 16 मई 2008 की ही रात थी जब नोएडा के पॉश इलाकों में से एक जलवायु विहार में सनसनीखेज हत्या का केस सामने आया। शहर के मशहूर डेंटिस्ट राजेश तलवार औप नुपुर तलवार की बेटी आरुषि का गला कटा शव उनके घर में मिला। इस मामले में सबसे पहले 45 साल के घरेलू नौकर हेमराज पर गया। लेकिन 17 मई को हेमराज का शव तलवार के अपार्टमेंट से बरामद हुआ। - 19 मई को मामले की जांच शुरू हुई और इसमें दिल्ली पुलिस भी शामिल हुई। - 22 मई को शुरुआती जांच के बाद मामला ऑनर किलिंग का लगा और आरुषि के पिता राजेश तलवार से पूछताछ हुई। - मामला संदिग्ध लगा और पुलिस का ये मानना था कि राजेश तलवार ने आरुषि और नौकर हेमराज को आपत्तिजनक हालत में देखा और वो अपना आपा खो बैठे थे। राजेश तलवार ने गुस्से में अपनी बेटी की हत्या की। लेकिन तलवार दंपति और उनके दोस्तों की दलील थी कि बिना किसी साक्ष्य या फॉरेंसिक जांच के यू पी पुलिस उन्हें क्यों दोषी मान रही है। उनका कहना था कि पुलिस अपनी नाकामी छिपाने के लिए राजेश तलवार को बलि का बकरा बना रही है। - 16 मई 2008 को आरुषि की हत्या के एक हफ्ते बाद राजेश तलवार को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया। जमानत मिलने से पहले 60 दिन तलवार को जेल में गुजारने पड़े। यूपी पुलिस का जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद तत्कालीन सीएम मायावती ने पूरे मामले को सीबीआई को सौंप दिया। - सीबीआई जांच में हर मोड़ पर सनसनीखेज जानकारियां सामने आती रहीं। दिलचस्प बात ये थी कि एक ही तरह के साक्ष्य पर सीबीआइ के दो जांचकर्ताओं के निष्कर्ष अलग थे। अरुण कुमार की अगुवाई में पहली टीम ने पर्दाफाश करने का दावा किया और इस संबंध में तलवार के कंपाउंडर कृष्णा और दो घरेलू नौकर राजकुमार और विजय मंडल को गिरफ्तार किया। लेकिन चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहने पर तीनों आरोपी कानून के फंदे से बच निकले। - 2009 में सीबीआई ने इस केस को दूसरी टीम को सौंपा। दूसरी टीम ने जांच प्रक्रिया में खामियों को दिखाते हुए मामले को बंद करने की सिफारिश की। परिस्थितजन्य साक्ष्य के आधार पर दूसरी टीम ने राजेश तलवार को मुख्य संदिग्ध माना लेकिन साक्ष्यों के ही कमी का हवाला देकर आरोपित करने से मना कर दिया। - सीबीआई की विशेष अदालत ने जांचकर्ताओं की दलील को ठुकरा दिया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तलवार दंपति पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। - चार साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद गाजियाबाद की सीबीआई की विशेष अदालत ने 26 नवंबर 2013 को तलवार दंपति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। फिलहाल तलवार दंपति डासना जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। 11जनवरी 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार की अपील पर फैसला सुरक्षित किया। 1 अगस्त 2017- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दुबारा सुनेंगे क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास हैं. - दो सदस्यों वाली बेंच ने सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा और फैसला सुनाने के लिए 12 अक्टूबर 2017 की तारीख मुकर्रर की।



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