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इन 25 कॉलेजों में ले रहे एडमिशन तो संभल जाएं

रायपुर: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का बुरा हाल है। शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। राजधानी समेत प्रदेश के 25 कॉलेज ऐसे हैं, जहां न पर्याप्त शिक्षक हैं न ही प्रैक्टिकल के लिए लैब। इसके बाद भी इन कॉलेजों में स्नातकोत्तर(पीजी) की कक्षाएं खोल दी गई हैं। खास बात यह कि इन कक्षाओं में प्रवेश की अंतिम तारीख 6 सितंबर रखी गई है। शिक्षक विरोध कर रहे हैं, इसके बाद प्रवेश की अंतिम तारीख में कोई इजाफा नहीं किया गया है। ऐसे में चौतरफा एक ही सवाल हो रहा है कि इन कॉलेजों में यदि प्रवेश हो भी जाते हैं तो संसाधन के अभाव में समय पर छात्रों की पढ़ाई कैसे पूरी होगी। शिक्षकों की मानें तो इन कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के बाद विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो महीने अक्टूबर-नवंबर में ही पढ़ने के लिए समय है। इसके बाद दिसंबर में पीजी के पहले सेमेस्टर की कक्षाएं हैं। अंदरूनी विवाद के बीच कुछ कॉलेजों ने इस साल से पढ़ाई शुरू नहीं करने की मांग की है। गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग ने 25 कॉलेजों में नई पीजी कक्षाओं के लिए 22 अगस्त को सचिवालय से आदेश जारी किया। यह आदेश कॉलेजों में एक सप्ताह बाद पहुंचा तो हड़कंप मच गया। इन कॉलेजों में इतनी सीटें खोलीं उच्च शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ पीजी कॉलेज में एमएससी रसायनशास्त्र के लिए 30, एमएससी मानव विज्ञान और एमएससी भौतिकशास्त्र के लिए 20-20 सीटों पर कोर्सेस ,सरकारी कॉलेज भखारा में एमएससी वनस्पतिशास्त्र 25, एमएससी प्राणीशास्त्र 25 सीट। संत गुरु घासीदास कॉलेजा धमतरी में एमएससी बायोटेक 30 सीट, निरंजन केशरवानी कॉलेज बिलासपुर एमए अंग्रेजी 30 सीट, सरकारी कॉलेज खुर्शीपार दुर्ग एमए राजनीति 30, एमकॉम 25, एमएससी गणित 20 सीट, केमटी कन्या कॉलेज रायगढ़ एमए मनोविज्ञान 20 समेत प्रदेश के 25 कॉलेजों में अलग-अलग संकाय में नई पीजी कक्षाएं शुरू की गई हैं। कॉलेजों से नहीं पूछा, सुविधा है या नहीं : राजधानी के छत्तीसगढ़ पीजी कॉलेज में एमएससी रसायनशास्त्र के लिए 30, एमएससी मानव विज्ञान और एमएससी भौतिकशास्त्र के लिए 20-20 सीटों पर कोर्सेस शुरू किया गया है। इस कॉलेज में विभाग की ओर से कोई भी एमएससी भौतिकी की कक्षाएं खोलने का प्रस्ताव नहीं दिया गया था। न ही किसी स्तर पर उच्च शिक्षा ने कोई जानकारी ही ली। अभी कम पड़ रही लैब : छत्तीसगढ़ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएल देवांगन ने स्वीकार किया कि उनके यहां एमएससी कक्षाओं के प्रारंभ करने के लिए फिलहाल लैब नहीं है और न इसकी व्यवस्था हो सकती है। लेकिन अब राज्य शासन का आदेश है तो कोर्स चलाना ही पड़ेगा। अभी बीएससी में ही हर विद्यार्थी के लिए सप्ताह में दो दिन प्रायोगिक कक्षाएं देने के बजाय एक ही दिन समय दिया जा रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि अब एमएससी की कक्षाओं के प्रैक्टिकल कैसे होंगे। खोज रहे विद्यार्थी : अन्य कॉलेजों में दाखिले हो चुके हैं। नई कक्षाएं होने के कारण ज्यादातर विद्यार्थियों को अभी तक जानकारी भी नहीं है कि यहां कोई कक्षाएं शुरू हुईं हैं। चाहिए तीन शिक्षक , स्वीकृत सिर्फ एक जिन कॉलेजों में एमएससी की कक्षाएं शुरू हुईं हैं वहां रसायन, भौतिकी, प्राणीशास्त्र और मानव विज्ञान के हिसाब से न्यूनतम तीन शिक्षकों की जरूरत है। सरकार ने सिर्फ एक शिक्षक के पद स्वीकृत किया है वह भी कई जगहों पर नहीं भर पाए हैं। महंगे उपकरण पीजी के हिसाब से जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कॉलेजों में विज्ञान विषयों में पीजी कक्षाएं हैं वहां प्रयोगशाला में इंस्टालेशन, लाइब्रेरी में अपडेट किताबें, पर्याप्त बैठक व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कक्षा की जरूरत होगी लेकिन यह सब देखे बगैर पहले ही कक्षाएं शुरू कर दी गईं हैं। बजट मिला तब जारी हुआ देरी कहां से हुई मुझे जानकारी नहीं हुई । लेकिन बजट जब मिलता है तभी तो कोर्स खोलेंगे। इस साल तो दाखिले के लिए तिथि भी बढ़ाई गई है। जहां पहले से ही बीएससी क्लासेस हैं वहां पीजी के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी। -बसव एस राजू, आयुक्त, उच्च शिक्षा



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