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बहुओं के साथ बेटी जैसा व्यवहार करें, घर में सदैव सुख-शांति रहेगी

बागली 03 दिसंबर: हमें जीवन में ऐसे कर्म करते जाना है जो मोक्ष के मार्ग तक पहुंचते हो। हम संस्कार से गिरते जा रहे हैं। हमें गुरु द्वारा बताए मार्गदर्शन पर चलकर जीवन को सफल बनाना है। भगवान ने हमें करोड़पति बनाया है, लेकिन हमें करुणापति बनना है। पाश्चात्य संस्कृति ने हमारे घर की सुख-शांति छीन ली है। हम संस्कारी धर्म भूल गए हैं और शांति खो बैठे हैं। भागदौड़ की इस जिंदगी में धन तो बहुत है, लेकिन उससे हमें सुख-शांति नहीं मिलती है। हमें वह संस्कृति हमारे घर में लाना है तथा ह्दय में धारण करना है, जो घर परिवार को संस्कारी बनाए। ये विचार पं. कैलाशचंद्र व्यास ने व्यक्त किए। वे ग्राम छतरपुरा की पाटीदार धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर रविवार को उपस्थित श्रद्घालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वाट्सएप एवं मोबाइल संस्कृति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इन्होंने घर की सुख-शांति छीन ली है। माता-पिता को चाहिए वह अपने बच्चों को संस्कार दें। बहुओं को अपनी बेटी माने और उनके साथ बेटी जैसा व्यवहार करें। इससे घर में सदैव सुख-शांति रहेगी। हमें शिक्षा प्राप्त कर अज्ञानता को दूर करना है। पं. व्यास ने कथा के दौरान राजा परीक्षित एवं सुखदेव महाराज का प्रसंग भी सुनाया। कथा की पूर्णाहुति पर शोभायात्रा निकाली गई। आयोजक बाबूलाल राणा, सूरजमल राणा एवं राजमल राणा सहित श्रद्घालुओं ने व्यासपीठ की आरती की। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें ग्राम छतरपुरा सहित आसपास के ग्राम नयापुरा, बागली, चापड़ा, करनावद, देवगढ़, नेवरी, पांदा, चुरलाय आदि गांवों के हजारों श्रद्घालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।


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