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गोमूत्र और गोबर से बनाए जा रहे 12 प्रकार के उत्पाद

महासमुंद 22 अगस्त:प्रदेश में एक तरफ जहां धमधा राजपुर के शगुन गौशाला इन दिनों गायों की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। वहीं महासमुंद के भलेसर स्थित श्रीवेदमाता गायत्री गौशाला यहां किए जा रहे अभिनव प्रयोगों के लिए जनमानस का ध्यान बटोरने में लगा है। यह गौशाला केवल गायों का संरक्षण, देखभाल, चारा खिलाने, दूध निकालने, दूध बेचने और कंडे बनाकर बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि गौशाला में लोगों की विभिन्न शारीरिक व्याधियों को दूर करने के लिए गौमूत्र व गोबर से 12 प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। यह उत्पाद लोगों की व्याधियों को हरने के लिए दवा के तौर पर उपयोग किए जा रहे हैं। गौशाला अध्यक्ष तिलकचंद साव की मानें तो यहां बनाए जा रहे उत्पादों को वैज्ञानिक जांच के लिए नमूना ओडिशा और दिल्ली भेजा गया है। मोबाइल रेडिएशन दूर करने के लिए गोबर से बना स्टीकर गौशाला में गोबर से स्वास्तिक, ओइम, भगवान शिव, गणेश, गौमाता के आकृति के मोबाइल स्टीकर बनाए गए हैं। यह स्टीकर मोबाइल के पीछे लगाए जाते हैं। समिति के अध्यक्ष और योगाचार्य तिलकचंद साव का कहना है कि गोबर के स्टीकर मोबाइल से निकलने वाले हानिकारण विकिरणों से मोबाइल धारक की रक्षा करने में मददगार है। उन्होंने मोबाइल पकड़ाकर व मोबाइल के बिना तथा स्टीकर लगे मोबाइल पकड़ा कुछ प्रयोग बताए, जिससे शरीर पर मानव बल पर मोबाइल रेडिएशन का प्रभाव देखा गया। साव ने गौशाला में बनाए गए गोबर की माला दिखाई। इसका प्रभाव बताया गया है कि गले में लगाए रहने से स्नानु संबंधी रोगों में आराम मिलता है। वहीं गोबर से बनाई गई आकर्षण चूड़ियां भी दिखाई गई। इन चू़िड़यों का भी रोगोपचार में महत्व बताया गया। गौशाला में अन्य उत्पाद भी बनाए जाते हैं जैसे पूजन के लिए गौरी-गणेश, कंडे आदि। इसके अलावा पायरिया व मुख रोगों से उपचार के लिए गोबर आदि से बनाए गए दंत मंजन, गोअर्क, गो मूत्र भी विक्रय के लिए रखे गए हैं। साव ने बताया कि गोमूत्र व गोबर से बना कीटनाशक भी बनाया गया है, जिसके छिड़काव से फफूंद और कीट नियंत्रण संभव बताया गया है। गौशाला में गोबर गैस का प्लांट लगाया गया है, जिससे बने गैस से स्टाफ के लिए भोजन तैयार होता है। यहीं नहीं चर्म रोगों के उपचार के लिए गौशाला परिसर में गौमूत्र से वाष्प स्नान की व्यवस्था बनाई गई है। गोमूत्र से स्टीम बाथ लेने से लोगों के चर्म रोग दूर होना बताया गया है। गौशाला के 3 कर्मचारी हैं प्रशिक्षित संचालन समिति अध्यक्ष साव ने बताया कि नागपुर के पास डेवलापाल से गौशाला के तीन कर्मचारियों ने 7 दिन का प्रशिक्षण लिया है। यहीं कर्मचारी यहां गौमूत्र व गोबर से उत्पाद बनाते हैं। कहीं मशीनरी की कमी होने से खुद मशीन डिजाइन कर मशीन बनाते हैं। भावना जगाने का काम कर रहा रिक्शा गाड़ी दो रोटी-दो रोटी की अपील करते हुए हर दिन नगर के विभिन्न गलियों में भ्रमण कर गौशाला के लिए भोजन एकत्रित करने में तीन रिक्शा चालक लगे हुए हैं। प्रतिनिधि अपने निर्धारित समय व स्थान पर चालक रिक्शा लेकर पहुंचते हैं। गौ आराधना सुनकर गोमाता के लिए रोटी-चावल निकाल देते हैं। चलित रिक्शा से लोगों में गौवंश के प्रति अच्छी भावना बन रही है, वहीं रिक्शा से हर दिन भोजन का सहयोग लेने के पहल की सराहना हो रही है। गौवंश केवल दूध, दही घी तक सीमित नहीं अध्यक्ष व योगाचार्य तिलक साव का कहना है कि ग्रामीण भारत में किसान गोवंश के केवल दूध, दही, घी, गोबर तक ही सीमित समझता है। जबकि गोवंश का गोबर, मूत्र बहुउपयोगी है। इसके कई उत्पाद सामान्य प्रशिक्षण से किसान अपने घर में ही बनाकर लोगों को उपलब्ध करा सकते हैं, जिससे किसानों, गोपालकों को अतिरिक्त आय होगी। होता यह है कि गाय ने दूध देना बंद कर दिया तो पालक उसे सड़क पर छोड़ देते हैं। यह सहीं नहीं है, दूध के अलावा विक्रय के लिए मूत्र और गोबर भी महत्वपूर्ण है। सांसद ने अपनाया उत्पाद, की सराहना लोकसभा सांसद चंदूलाल साहू ने गौशाला से बने उत्पाद का उपयोग किया है। उन्होंने शनिवार को गौशाला के निरीक्षण के दौरान कीटनाशक, दंत मंजन, गोमूत्र की प्रशंसा की।



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