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सिजोफ्रेनिया को जटिल बनाने वाली जीन की वैज्ञानिकों ने की पहचान

टोक्‍यो: वैज्ञानिकों ने मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया की वजह का पता लगा लिया है। रिसर्च के जरिए वैज्ञानिकों ने ऐसी जीन की पहचान की है,जो इस बीमारी के बढ़ने में अहम भूमिका निभाता है।नए शोध में आरटीएन4आर जीन की पहचान की गई है। इस विकार को यह जीन जटिल बना देता है। इस खुलासे के बाद बीमारी के उपचार का नया रास्ता खोजा जा सकेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, दुनिया भर में सिजोफ्रेनिया से 2.1 करोड़ लोग पीड़ित हैं। यह जाहिर है कि इनमें से 80 फीसद मामले आनुवंशिक वजहों से हैं। जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तोशिहाइड यमाशिता ने कहा कि तंत्रिका सर्किट में गड़बड़ी के चलते सिजोफ्रेनिया की समस्या खड़ी होती है। मेलिन संबंधित जीन्स का इस बीमारी से जुड़ाव है। ये तंत्रिका सर्किट को संकेत भेजने के लिए कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं। सिजोफ्रेनिया की पहचान में मेलिन की भूमिका हो सकती है। दरअसल सीजोफ्रेनिया एक मानसिक बीमारी अर्थात मेंटल डिसआर्डर की स्थिति है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को अक्सर तरह-तरह आवाज़ें सुनाई देती रहती हैं और लगता है सभी लोग उनके ख़िलाफ़ षड़यंत्र रच रहे हैं। यहां तक कि कई बार तो वे खुद को भगवान भी मान लेते हैं। सीजोफ्रेनिया ज्यादातर तब होता है, जब मनुष्य के दिमाग में मौजूद डोपामिन नामक एक केमिकलका का स्राव अधिक होने लगता है।



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