Tez Khabar. Khas Khabar

News Aaj Photo Gallery
NSE 10478
BSE 33848
hii
Gold 30225
Silver 39700
Home | आलेख

हिमाचल चुनाव: यहां राजपूतों की ताकत और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से मिलती है सत्ता

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है. राज्य में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे. विधानसभा की 68 सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में 9 नवंबर को वोटिंग होगी और 18 दिसंबर को नतीजे आएंगे. यह चुनाव देश की दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी के लिए बेहद अहम है. लगभग पूरे देश में कमजोर हो चुकी कांग्रेस के सामने हिमाचल प्रदेश में सत्ता बचाने की चुनौती है तो बीजेपी के सामने अपने विजय अभियान को जारी रखने का मौका है. इस राज्य के विधानसभा चुनाव इतिहास पर नजर डालें तो यहां बीजेपी और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता का स्वाद चखती रही हैं. यानी इस राज्य में लंबे समय से दोनों में से कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आ पाई है. राजनीति के जानकार मानते हैं कि इस राज्य में जातीय समीकरण बड़ा ही दिलचस्प है. यहां राजपूत और ब्राह्मण वोटर सबसे ज्यादा हैं. ऐसे में दोनों राजनीतिक दलों ने शुरू से ही इन्हीं दोनों जातियों पर अपना फोकस कायम रखा है. राज्य में बीजेपी और कांग्रेस के स्टार नेताओं की लिस्ट पर भी नजर डालें तो यहां भी ब्राह्मण और राजपूत समाज के ही लोग नजर आते हैं. दरअसल, हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा आबादी राजपूतों की है जो 37.5 फीसदी हैं. वहीं दूसरे नंबर पर ब्राह्मण हैं. इनकी आबादी 18 फीसदी है. इन दोनों जातियों को जोड़ दें तो यह आकंड़ा 55 फीसदी पहुंच जाता है. ऐसे में राज्य की सत्ता में काबिज होने के लिए इन दोनों जातियों को साधना सबसे जरूरी है. राज्य की बाकी की 45 फीसदी आबादी पर नजर डालें तो दलित 26.5 फीसदी और अन्य जातियां 16.5 फीसदी हैं. ऐसे में राजपूतों और ब्राह्मणों के वोटों के सामने अन्य जातियां की भूमिका खास नहीं रह जाती है. बीजेपी आजमा सकती है ब्राह्मण चेहरा जातीय समीकरण को देखते हुए बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों पर दांव लगाने की तैयारी में है. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि बीजेपी केंद्रीय मंत्री जेपी जेपी नड्डा के चेहरे को आगे रख सकती है. इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके प्रेम कुमार धूमल ने राज्य की मेन स्ट्रीम राजनीति से लगभग खुद को अलग कर लिया है. वहीं उनके बेटे अनुराग ठाकुर उनके राजनीतक विरासत को संभाल रहे हैं. धूमल की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उनकी बढ़ती उम्र बताई जा रही है. 73 वर्षीय के धूमल को कमान सौंप कर बीजेपी पीएम मोदी के जरिए 75 वर्ष के तय उम्र की सीमा की अवहेलना भी नहीं करना चाहेगी. बीजेपी को भरोसा है कि धूमल और उनके बेटे अनुराग ठाकुर के चेहरे पर अच्छी खासी संख्या में राजपूत वोट उन्हें मिल जाएंगे. ऐसे में अगर ब्राह्मणों का कुछ फीसदी वोट मिल जाए तो सत्ता पाना आसान हो जाएगा. इस फॉर्मूले में जेपी नड्डा सबसे अच्छे विकल्प हो सकते हैं. नड्डा अमित शाह ds करीबी होने के साथ संघ परिवार की भी पसंद माने जाते हैं. कांग्रेस का फोकस राजपूतों पर वीरभद्र सिंह राजपूत बिरादरी से आते हैं. कांग्रेस एक बार फिर से वीरभद्र सिंह की अगुवाई में भाग्य आजमा रही है. इसके अलावा कांग्रेस आनंद शर्मा के चेहरे को आगे रखकर ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश कर सकती है. दोनों पार्टियों के प्लान पर नजर डालें तो इनका फोकस राजपूतों और ब्राह्मणों पर है. हालांकि 18 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही तय हो पाएगा कि बीजेपी या कांग्रेस में से राजपूत और ब्राह्मण समाज का समर्थन किसे मिल पाता है.



यह लेख आपको कैसा लगा
   
नाम:
इ मेल :
टिप्पणी
 
Not readable? Change text.

 
 

सम्बंधित खबरें

 
News Aaj Photo Gallery
 
© Copyright News Aaj 2010. All rights reserved.