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फिलिस्तीनी राजदूत- हाफिज सईद की मुलाकात से क्यों अरब देश हुए परेशान

नई दिल्ली: दिसंबर की सर्दी में मध्य पूर्व में ऐसा बदलाव हो रहा था जिसके असर से भारत अपने आप को अलग नहीं कर सकता था। ट्रंप प्रशासन ने यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर जब मान्यता दी तो अरब देश बौखला गए। अरब देशों के विरोध के बाद ये मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में गया जहां सदस्य देशों ने अमेरिकी मान्यता को बहुमत से खारिज कर दिया। इस मुद्दे पर भारत सरकार ने इजरायल- अमेरिका के साथ संबंधों की परवाह किए बगैर अरब देशों के साथ उठ खड़ा हुआ। यरुशलम पर अमेरिकी मान्यता वाले प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया और फिलिस्तीन के साथ ऐतिहासिक संबंधों का निर्वहन किया। लेकिन फिलिस्तीन के राजदूत वालिद अबु अली पाकिस्तान के रावलपिंडी में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड अंतरराष्ट्रीय आतंकी और लश्कर का संस्थापक हाफिज सईद के साथ मंच साझा किया। इस पृष्ठभूमि में ये समझने की जरूरत है कि क्या आतंकी सईद के साथ फिलिस्तीन के राजदूत का मंच साझा करना नासमझी थी।क्या पाकिस्तान इस रैली के जरिए भारत और अरब देशों के संबंधों को बिगाड़ना चाहता है। क्या हाफिज सईद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर( इस्लामिक देशों से) अपने संगठन को मान्यता दिलाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है।   एक मंच पर हाफिज सईद और फिलिस्तीनी राजदूत फिलिस्तीनी राजदूत वालिद अबु अली पाकिस्तान के रावलपिंडी के लियाकत बाग में आयोजित हाफिज सईद की रैली में शामिल हुए। इस रैली का आयोजन दिफाह-ए-पाकिस्तान काउंसिल के द्वारा किया गया था। यह काउंसिल पाकिस्तान में धार्मिक समूहों और राजनीतिक पार्टियों का एक गठबंधन है,जिसमें हाफिज सईद का संगठन भी शामिल है। यह कट्टरपंथी संगठन अक्सर हर मौकों पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। हाफिज सईद की रैली को फिलिस्तीनी राजदूत वलीद अबु अली ने संबोधित भी किया। रैली से संबंधित तस्वीरों को पाकिस्तानी पत्रकार उमर कुरैशी ने ट्वीटर पर शेयर किया है। जिसमें फिलिस्तीन के राजदूत आतंकी हाफिज सईद के साथ मंच साझा करते नजर आ रहे हैं। बहरहाल, इन तस्वीरों के सामने आने के बाद हर तरह बहस छिड़ गई है। अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित होने के बाद हाल ही नजरबंदी से रिहा हुआ आतंकी हाफिज सईद अब राजनीतिक गलियारों में अपने पैर पसारने की कोशिशों में जुटा है। वह पहले ही आगामी चुनाव में उतरने का ऐलान कर चुका है। पाकिस्तान की सरकार और वहां की सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद भी हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग ने बीते दिन लाहौर में अपना दफ्तर भी खोला है।  यरुशलम के मुद्दे पर अरब देशों की अपील के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के खिलाफ मत दिया। ऐसे में फिलिस्तीनी राजदूत की हाफिज के साथ मंच साझा करना गैरजिम्मेदाराना हरकत है। उनके मुताबिक फिलिस्तीनी राजदूत और हाफिज की मुलाकात के जरिए पाकिस्तान की कोशिश है कि अरब देशों के साथ भारत के रिश्ते खराब हो जाएं। इसके अलावा पीएम मोदी के प्रस्तावित फिलिस्तीनी दौरे पर भी असर पड़े। यही नहीं अरब देशों के लिए भी असहज हालात हैं, एक तरफ जहां भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अरब देशों पर निर्भर है वहीं अरब देश खाद्यान्न के अलावा जेम्स और स्टोन जैसे चीजों के लिए भारत पर निर्भर हैं। इसी क्रम में हर्ष वी पंत ने कहा कि हाफिज सईद और फिलिस्तीनी राजदूत की मुलाकात को हमें गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में यरुशलम के मुद्दे पर फिलिस्तीन का समर्थन उनकी वजह से नहीं था बल्कि भारत ने अरब देशों के साथ रिश्तों का ख्याल रखा। भारत को इस मुलाकात को अरब देशों के साथ जोरदार ढंग से उठाना चाहिए। अरब देशों को ये बताने की जरूरत है कि आप दोमुंहा बर्ताव नहीं कर सकते हैं। हाफिज सईद के साथ फिलिस्तीनी राजदूत का मंच साझा करना उनकी नासमझी है ऐसे में भारत सरकार को अरब देशों को स्पष्ट संदेश देने की जरूरत है कि वो फिलिस्तीन पर लगाम लगाए। अरब देशों को ये भी बताने की जरूरत है कि उन्होंने फिलिस्तीन का समर्थन उनकी वजह से किया था। आज जब इजरायल के साथ भारत के बेहतर रिश्ते हैं वैसे में तेलअवीव को रुष्ट करने का कोई अर्थ नहीं है। फिलिस्तीन के साथ क्या दूसरे देश भी हाफिज के समर्थन में आ सकते हैं इस मुद्दे पर हर्ष वी पंत ने कहा कि इसकी संभावना कम है। अगर आप अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को देखें तो पश्चिमी जगत अब खुलकर मानता है कि हाफिज और उसका संगठन मानवता के लिए खतरा है। इसके अलावा चीन के शियामेन में ब्रिक्स घोषणापत्र में साफ उल्लेख है कि हाफिज एक आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है। कश्मीर, मुशर्रफ और हाफिज सईद यहां ये बता देना जरूरी है कि हाफिज सईद कहता है कि कश्मीर में आजादी की लड़ाई जारी है और उसका संगठन बेगुनाह कश्मीरियों को हर ढंग से मदद मुहैया कराता रहेगा। हाफिज के बोल बोलते हुए पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ये कह चुके हैं हाफिज सईद बेहतर इंसान है। जिस वक्त उन्होंने लश्कर पर प्रतिबंध लगाया था उस वक्त वो हाफिज सईद के बारे में कम जानते थे। लेकिन सच ये है कि हाफिज बेहतर इंसान हैं और वो उन्हें चाहते हैं ऐसे में सवाल ये है कि मुशर्रफ के इस बयान का क्या मतलब था। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए हर्ष वी पंत ने  कहा कि अगर इस्लामी देशों के संगठनों की बात करें तो वो अक्सर कश्मीर के मुद्दे को उठाने से बाज नहीं आते हैं, ऐसे में अरब देशों को समझाने की जरूरत है कि अब वो कश्मीर के मुद्दे पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखें। क्योंकि हाफिज अपनी सभी तकरीरों में कश्मीर में भारत के दखलंदाजी का जिक्र करता है।



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