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इस दिवाली हुई कम खरीदारी, जीएसटी और नोटबंदी का दिखा असर

नई दिल्ली:  रिटेल कारोबारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (केट) के मुताबिक इस बार व्यापारियों के लिए दिवाली की रौनक न के बराबर रही और व्यापार में मंदी का माहौल रहा है। इस कारण बीते 10 वर्षों में इस साल की दिवाली सबसे फीकी रही। देश के रिटेल व्यापार में प्रत्येक वर्ष करीब 40 लाख करोड़ का कारोबार होता है। मसलन, 3.5 लाख करोड़ प्रति महीना जिसमें से महज पांच फीसद का हिस्सा संगठित क्षेत्र का है। शेष हिस्सा स्वयं संगठित क्षेत्र का है। दिवाली से 10 दिन पहले सामान की बिक्री बीते वर्षों में लगभग 50 हजार कोरड़ रही जिसमें इस बार 40 फीसद की कमी देखने को मिली है। दिवाली पर मुख्य रूप से रेडिमेड गारमेंट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, एफएमसीजी प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, किचन संबंधी सामान, घड़ियां, गिफ्ट आइटम, मिठाइयां, ड्राई फ्रूट आदि की बिक्री होती है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भारतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा की उपभोक्ताओं के पास नकद तरलता की कमी के चलते उनकी खरीदने की क्षमता पर गहरा प्रभाव पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर नोटबंदी के बाद बाजारों में अस्थिरता और जीएसटी के लागू होने के बाद जो पोर्टल में दिक्कतें आईं है, इससे अनिश्चितता का माहौल दिखाई दिया। अब व्यापारियों की उम्मीद 31 अक्टूबर से शुरु हो रहे शादियों से सीजन पर है। यह 14 दिसंबर तक और फिर 14 जनवरी से शुरू होगा। ऐसे में सरकार को बाजार में छाई सुस्ती को दूर करने के लिए रिटेल कारोबारियों को प्रोत्साहित करना होगा। इससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और बाजार में खरीदारी का माहौल बनेगा।



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