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जरूरी था नागा उग्रवाद पर यह प्रहार, फिर उठाने लगे थे सिर

भारतीय सेना ने एक और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है। भारत से सटी म्यांमार सीमा पर नागा उग्रवादियों के संगठन NSCN-K को निशाना बनाया गया है। बड़ी संख्या में उग्रवादियों के ढेर होने की सूचना है। 2015 में भी सेना ने यहां सर्जिकल स्ट्राइक की थी। जानें भारत की इस सीमा पर कैसे हालात हैं और इस सर्जिकल स्ट्राइक की नौबत क्यों आई? - मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा पर नागा उग्रवादियों का आतंक रहता है। ये भारतीय सैनिकों पर छिप कर वार करते हैं। खासतौर पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड यानी NSCN-K का इन इलाकों में भारी आतंक है। - इसी नागा संगठन के खिलाफ भारतीय सेना ने सितंबर 2017 से बड़ा ऑपरेशन छेड़ रखा है। बताया गया है कि यह सर्जिकल स्ट्राइक भी इसी प्लान का हिस्सा है। - इसी माह के शुरू में भी सेना के साथ फायरिंग में NSCN का एक उग्रवादी ढेर हुआ था। अरूणाचल-म्यांमार बॉर्डर पर चल रहे सेना के इस बड़े ऑपरेशन को स्पेशल फोर्सेज के कमांडो ने अंजाम दिया है। - सैन्य सूत्रों के मुताबिक, 2015 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस उग्रवादी संगठन की कमर टूट गई थी, लेकिन हाल के दिनों इन्होंने फिर सिर उठाना शुरू कर दिया था। जानें क्या हुआ था 2015 में नागा उग्रवादियों ने 4 जून 2015 को मणिपुर के चंदेल जिले में भारतीय सेना पर घात लगाकर हमला किया था और 18 जवानों को शहीद कर दिया था। इस पर भारत में जबरदस्त गुस्सा भड़का। इसके बाद सेना ने ऑपरेशन की रणनीति पर काम शुरू किया। तब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने इंटेलिजेंस से मिले इनपुट्स की निगरानी शुरू की। इस हमले की पूरी योजना प्रधानमंत्री की जानकारी में तैयार हुई थी और प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी अनुमति दी थी। भारतीय सेना को पता चला कि उग्रवादी हमला करके म्यांमार सीमा में छिप गए थे। इसके बाद म्यांमार सीमा में पैराकमांडो ने घुसकर उग्रवादियों के दो कैंप नष्ट कर दिए। इस ऑपरेशन में करीब 100 उग्रवादी मारे गए थे। 40 मिनट तक चली इस सर्जिकल स्ट्राइक में 70 कमांडो शामिल थे।



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