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इस वजह का हवाला देकर चीन नहीं दे रहा भारत को ब्रह्मपुत्र नदी के आंकड़े

बीजिंग :डोकलाम विवाद खत्म होने के बाद भी भारत-चीन के रिश्तों में आई खटास कम होती नहीं दिख रही।कम से कम चीन के रुख को देखकर तो ऐसा ही लगता है। इस बार चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी के जल संबंधी वैज्ञानिक आंकड़े फिलहाल भारत को देने से इंकार कर दिया है।   चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बताया कि लंबे समय से भारतीय पक्ष के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलुज नदियों के आंकड़े साझा किए जा रहे हैं। लेकिन अब उसके यहां आंकड़े एकत्र करने वाले तिब्बत स्थित स्टेशन का सुधार कर उसे बेहतर बनाया जा रहा है। इसलिये फिलहाल वह ब्रह्मपुत्र के आंकड़े भारत से साझा नहीं कर पाएगा।   जब पूछा गया कि डोकलाम गतिरोध के कारण रोके ब्रह्मपुत्र नदी के आंकड़े चीन अब कब मुहैया कराएगा? जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस पर बाद में विचार करेंगे। उल्लेखनीय है कि १८ अगस्त को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया था कि वर्ष 2006 से विशेषज्ञ स्तर पर सतलुज और ब्रह्मपुत्र नदी के आंकड़े चीन भारत से साझा करता है। यह जानकारी 15 मई से 15 जून तक बाढ़ के मौसम का ब्योरा देती है।   हालांकि चीन ने कहा कि वह नाथूला दर्रे को कैलास-मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर फिर से खोलने के लिए बातचीत के लिए तैयार है। चीन ने मंगलवार को कहा कि वह डोकलाम गतिरोध के बाद जून में रोक दी गई कैलास-मानसरोवर की यात्रा को फिर शुरू करने पर भारत से बातचीत करेगा। इस तीर्थयात्रा के लिए सिक्किम में नाथूला दर्रे को भारत में फिर से खोले जाने पर विचार-विमर्श होना है।   पिछले माह भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर 73 दिनों तक गतिरोध रहा था। चीन यहां पर सड़क बनाना चाहता था और भारत का इसका कड़ा विरोध कर रहा था। मानसरोवर जाने का सिक्किम का रास्ता 2015 से शुरू हुआ था। इसीलिए तीर्थयात्री बसों के जरिये नाथूला से 1500 किमी की दूरी तय करके कैलास पहुंचते हैं।



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